Lockdown के दौरान मदद न मिलने पर गौशाला में भूख से 80 गायों की मौत

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पिछले कुछ वर्षों में गाय पर राजनीति ने काफी रफ़्तार पकड़ी थी जो कहीं पर भी नहीं थमी तथा गायों के लिए अलग से प्रदेशों में गौशाला भी बनायीं गयी थीं मगर वही गौशाला गायों के लिए मौत का कारण बन गयी हैं. हरियाणा में भी गौशाला बनायीं गयी थीं तथा हरियाणा सरकार भी गौवंश की रक्षा, सुरक्षा की कसमें खाती नहीं थकती थी. समालखा चुलकाना रोड पर स्थित श्री कृष्ण गौशाला में लॉकडाउन

के दौरान प्रशासन से मदद ना मिलने की कारण 80 गायें भूख से दम तोड़ चुकी हैं. मृत गायों को कुत्ते नोच नोच कर खा रहे हैं तथा और भी गायों की हालत ठीक नहीं बताई जाती है. विधानसभा में क़ानून बना लेने भर से स्थिति में सुधार नहीं आता है बल्कि जमीनी स्तर पर भी काम होना चाहिए. गौशालाओं को लेकर प्रदेश में राजनीति तो खूब होती है मगर जब इन पर काम करने की बात होती है तो प्रशासन अपना पल्ला झाड़ते नज़र आते हैं.

गौशाला में खाने की कमी के कारण इतना बड़ा हादसा हुआ है. गाय के नाम पर वोट तो बहुत लिए जाते हैं गाय के दम पर सरकार भी बन जाती है मगर जब उन गायों की रखवाली और देखरेख का नंबर आता है तो सरकार मौन हो जाती हैं. गौशाला में ना तो किसी साफ़ सफाई का प्रबंध है और ना ही गायों के खाने के लिए चारे का वहीँ प्रबंधन का कहना है की गौशाला में क्षमता से ज्यादा गौवंश है. सरकार ने प्रबंधन की उस प्रार्थना को को भी नज़र अंदाज़ कर दिया जिसमे सरकार और प्रशासन से गौवंश को बचाने के लिए आग्रह किया गया था लेकिन वहां से कोई जवाब अब तक नहीं मिल पाया है.

जानकारी के मुताबिक समालखा चुलकाना रोड स्थित श्री कृष्ण गौशाला साढ़े तीन एकड़ में बनी हुई है. परन्तु लॉकडाउन के कारण गौशाला में गौवंश की संख्या 1850 हो गयी थी जबकि गौशाला में केवल 1100 गौवंश की ही क्षमता थी. उक्त गौशाला के मैनेजर कुलदीप ने बताया.

चारे की कमी के कारण एक साथ चारा डालने से गायों में अफरा तफरी के चलते 80 गायों की मौत हो चुकी है.

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