बीजेपी शाषित राज्य में भगवान् हनुमान को मारने की मिली इज़ाज़त

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यदि कहीं पर कोई पशु या पक्षी पीड़ित अवस्था में मिलता है तो लोग अफ़सोस ज़ाहिर करते हैं. अभी कुछ दिन पहले केरल में एक हथिनी के मारे जाने पर सभी लोगों का गुस्सा बाहर निकल आया था मगर सोचने वाली बात ये है हथिनी पशु की श्रेणी में हैं मगर बन्दर नहीं इसलिए ही हिमाचल प्रदेश के 91 तहसीलों में बंदरों को जान से मारने की सरकारी मंजूरी मिल चुकी है.

सरकार का तर्क है कि बन्दर फसल को बर्बाद कर देते हैं तथा किसानों को आर्थिक नुक्सान के ज़िम्मेदार हैं. वहीँ मंज़ूरी में यह भी साफ़ किया गया है कि किसान केवल अपनी निजी भूमि में ही बंदरों को मार सकते हैं, सरकारी भूमि में नहीं. बन्दों के शव को दफनाने की ज़िम्मेदारी भी मारने वाले की ही होगी तथा इसका कडाई से पालन होना चाहिए.

सरकार ने साफ़ किया है कि बन्दर मारने के तुरंत बाद नजदीक के वन अधिकारी-कर्मचारी को इसकी जानकारी उपलब्ध करवानी होगी. यह अनुमति एक वर्ष तक के लिए रहेगी. इस संबंध में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। हिमाचल सरकार के इस फैसले से मंडी जिला की 10 तहसीलों समेत प्रदेश की 91 तहसीलों के किसानों-बागवानों को राहत मिली है।

ना मारे जा सकने वाले बन्दर:

-बूढ़े, कमज़ोर, अपंग

-बच्चे वाली मादा

-गर्भवती मादा

91 तहसीलों में रसीस मकाक बंदरों को पीड़क जंतु घोषित किया गया है, डीएफओ मंडी एसएस कश्यप ने बताया. इनमें मंडी जिला की 10 तहसीलें भी शामिल हैं। इनमें मंडी, चच्योट, थुनाग, करसोग, जोगिंद्रनगर, पधर, लड़भड़ोल, सरकाघाट, धर्मपुर और सुंदरनगर को शामिल किया गया है।

हिन्दू धर्म के मुताबिक बन्दर को भगवान हनुमान का रूप माना जाता है, लोग भगवान् हनुमान के रूप में बन्दर की सेवा करके पुण्य कमाना चाहते हैं इसलिए बंदरों की संख्या में कमी नहीं आती है.

बन्दर हमेशा 30-40 के झुण्ड में रहते हैं और इतने बन्दर किसी भी फसल को नुक्सान पहुचने के लिए काफी हैं. 2015 में किये गए सर्वेक्षण के अनुसार हिमाचल प्रदेश में लगभग 2 लाख 7 हज़ार बन्दर थे. इनकी संख्या ना बढ़े इसके लिए व्यापक पैमाने पर नस्बन्दी कार्यक्रम भी चलाया गया था. बंदरों की की औसत आयु 25-30 वर्ष की होती है. नसबन्दी कार्यक्रम से इनकी जनसख्या में काफी कमी देखने को मिली. कार्यक्रम से पहले बंदरों की विकास दर 21.4 प्रति वर्ष थी.

हिमाचल प्रदेश में यदि आप एक बन्दर को पकड़ते हैं तो आपको सरकार 1 हज़ार रुपये देती है, वही ने बंदरों की नसबन्दी के लिए प्रदेश में 8 केंद्र भी खोले हुए हैं.

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