आयतुल्लाह माइक

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मिर्ज़ा शिबली बेग

आयतुल्लाह माइक जिसने 1979 में ‘एजेंसी’ ज्वाइन की , वह दूसरी पीढ़ी का है जिसने ‘सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी’ में अपनी सेवाएं दी । इससे पहले इसके पिता भी ऐजेंसी के आरंभ काल में अपनी सेवाएं दे चुके हैं । सीआईए की स्थापना और भारत की स्वतंत्रता का वर्ष एक ही है ।

‘ऐजेंसी’ ज्वाइन करने और प्रशिक्षण लेने के बाद पहली विदेश नियुक्ति पर विदेश सेवाओं से संबद्ध होकर पूर्वी अफ्रीकी देश तंजा़निया गया । पूर्वी अफ्रीका के कई देशों में कार्य किया । वहीं उसकी मुलाक़ात मॉरीशस में फरीदा करीमजी से हुई जिसकी मोहब्बत में गिरफ्तार होकर उसने इस्लाम स्वीकार कर लिया । और विवाह कर लिया ।

फरीदा करीमजी एक गुजराती मूल के कारोबारी परिवार की सदस्य थी । उसका परिवार 100 से अधिक वर्षों से मॉरीशस में कारोबार कर रहा था । जिसे ‘करीम जी जीवन भाई एंड कंपनी’ के नाम से जाना जाता है यह मॉरीशस के सबसे बड़े कारोबारी समूह में से एक है । इसका कारोबार बैंकिंग , इंश्योरेंस ,रियल स्टेट शॉपिंग मॉल ,उर्जा , रिटेल चेन , एफएमसीजी उत्पाद , तथा वितरण के क्षेत्र में है । मॉरीशस की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी एमटेल इसी परिवार की है । इसकी भारती एयरटेल के साथ भागीदारी है । यह परिवार पेप्सी का भी क्षेत्रीय भागीदार है ।

‘माइक’ ‘ऐजेंसी’ में तरक़क़ी की मंज़िल तय करता हुआ मिस्र में एजेंसी का ‘स्टेशन चीफ़’ हो गया । इसके बाद इराक़ का भी ‘स्टेशन चीफ़’ रहा । मुसलमानों की क्षेत्रीय भाषाओं का ज्ञान उनके रस्मो- रिवाज और सोच की गहरी समझ रखने के कारण ऐजेंसी की ओर से इसे इराक़ , लेबनान , ईरान ,यमन , अफगानिस्तान , सीरिया , पाकिस्तान में अमेरिकी हितों के लिए ऑपरेशन सौंपे गए ।

9/11 के बाद 2006 में ‘माइक’ को ‘ऐजेंसी’ के ‘काउंटर टेरररिज़्म सेंटर’ का प्रमुख बना दिया गया । वरीयता , योग्यता और महत्त्व की दृष्टि से यह ‘ऐजेंसी’ प्रमुख के मातहत पर वास्तविक रूप में समकक्ष पद था ।

‘माइक’ के ‘काउंटर टेरररिज़्म सेंटर’ का प्रमुख बनने के बाद बड़े स्तर पर ड्रोन हमलो का जाल बुना । जो पाकिस्तान , अफ़ग़ानिस्तान , यमन तक फैला था । इसमें अलक़ायदा और इस्लामी विचार रखने वाले सशस्त्र संगठनों को निशाना बनाया गया । ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के शब्दों में ” ” इस कार्य में हज़ारों इस्लामी चरमपंथी मारे गए और सैकड़ों मासूम भी निशाना बने । ”

‘सेंटर’ का प्रमुख रहते हुए ‘माइक’ का कारनामा अलक़ायदा के नेटवर्क को क्षीण करना और उसकी कमर तोड़ना है । साथ ही साथ ओसामा बिन लादेन को खोज कर ख़त्म करना ।अलकायदा में दूसरे नंबर के अबू जु़बेदा और ख़ालिद शेख़ मोहम्मद को खोज कर गिरफ्तार करना है । तथा 2008 में हिज़्बुल्लाह के नंबर दो ‘इमाद मुग़निया’ को दमिश्क़ में ‘माइक’ के आदेश पर निशाना बनाया गया ।

‘माइक’ 2017 में एजेंसी की ओर से ईरान ऑपरेशंस का प्रमुख बनाया गया । इसके नेतृत्व में जनरल ‘क़ासिम सुलेमानी’ की हत्या की गयी ।

‘सेंट्रल इंटेलिजेंस ऐजेंसी’ ने कभी ‘आतुल्लाह माइक’ की सही पहचान , उसके परिवार के संबंध में जानकारी तथा उसकी आयु को सार्वजनिक नहीं होने दिया । क्योंकि वह एक बहुत ही ख़तरनाक मिशन पर निरंतर कार्यरय था । ‘वाशिंगटन पोस्ट’ के पत्रकार ‘ग्रेग मिलर’ ने 2012 में इस पर एक स्टोरी की तब इसके बारे में बहुत थोड़ी मालूमात दुनिया के सामने आयी ।

पता चला कि चेनस्मोकर ‘आयतुल्लाह माइक’ उसका ख़ुफ़िया नाम था इससे उसके साथ काम करने वाले उसे पुकारते थे । यह नाम उसके ‘ईरान ऑपरेशन’ प्रमुख बनने के बाद मिला । इसके दूसरे ख़ुफ़िया नाम ‘रोजर’ , ‘डार्क प्रिंस’ और ‘अंडरटेकर’ भी थे । लेकिन असल नाम ‘माइकल डी एंडरिया’ था यह मध्य -पूर्व , उत्तरी अफ्रीका और मधय एशिया में ‘ऐजेंसी’ का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति था ।

27 जनवरी को स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1:10 पर अमरीकी सेना का एक हवाई जहाज़ गिरकर तबाह हो गया । यह घटना अफ़ग़ानिस्तान के ग़ज़नी प्रांत के देहयक ज़िले के सादोख़ेल गांव में हुई । जिसमें सभी सवाल मारे गए ।

यह जहाज़ अमरीकी एयर फोर्स ई11 ए था । जिसे ‘इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस एयरक्राफ्ट’ के रूप में जाना जाता है । यह अमेरिकी वायुसेना की 430 वी ‘इलेक्ट्रॉनिक कॉम्बैट स्क्वाड्रन’ का हिस्सा था ।

रूस की गुप्तचर संस्थाओं के हवाले से रूसी समाचार माध्यमों ने बताया है कि जहाज़ में शीर्ष सीआईए अधिकारी किसी विशेष मिशन पर निकले थे । जिनमें ‘ईरान ऑपरेशन प्रमुख’ ‘माइकल डी एंडरिया’ या ‘आयतुल्लाह माइक’ भी सवार था । जो इस हादसे का शिकार हुआ । ईरान के समाचार पत्रों में यह समाचार हर्ष के साथ प्रमुखता से छपा है । अमेरिकी वायुसेना और अफ़ग़ान सरकार ने भी इस घटना की पुष्टि की है ।

विमान के घटनास्थल को तालिबान ने अपने क़ब्ज़े में ले रखा है । यह उसके कंट्रोल वाला क्षेत्र है । घटना के बाद अफ़ग़ान फौज के साथ 300 अमेरिकी स्पेशल कमांडो ने घटनास्थल पर पहुंचने का प्रयास किया लेकिन तालिबान के साथ घमासान के बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा ।

‘इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस एयरक्राफ्ट’ अमेरिकी वायुसेना के अनुसार अज्ञात ख़राबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ । वहीं दूसरे समाचार माध्यमों विशेषकर ईरानी माध्यमों के अनुसार रूस निर्मित 9 के 32 स्ट्रेला द्वितीय मैनपैड मिसाइल , जो ज़मीन से हवा में मार करती है, से निशाना बनाया गया । यह मिसाइल स्ट्रिंगर मिसाइल की भांति कंधे पर रखकर चलाई जाती है ।विमान जिस स्थान पर गिरा वह स्थान पाकिस्तानी सीमा से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर है । हिंदूकुश पर्वत से लगी इस पूरी पट्टी के निकट अमेरिकी मित्र पाकिस्तान के सामरिक महत्व के स्थान स्थित है ।

तालिबान अमेरिकी शांति वार्ता अपने अंतिम चरण में है । इनके मध्य 10 दिवसीय संघर्ष विराम की घोषणा बस होने ही वाली थी । जिसके अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में स्थित 22613 विदेशी सैनिकों में से 13000 अमेरिकी हैं इनमें से लगभग 4500 अमरीकी सैनिकों को युद्ध विराम के दौरान अफ़ग़ानिस्तान से निकलना था । लेकिन इस घटना ने अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी है ।

क्षेत्रीय शक्तियां रूस, चीन और ईरान की रणनीति है जब शत्रु रुकना चाहे तो उसे भगाओ और जब भागना चाहे तो उसे रुकने पर विवश कर हानि पहुंँचाओ । इन सबके बीच नुक़सान में आम अफ़ग़ानी है ।

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begmirzashibli@gmail.com

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