ऊर्दू, फारसी पर कोर्ट ने लगाया रोक, FIR में नही दर्ज होगा ऊर्दू के 383 शब्द.

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दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को नया फरमान जारी की गई है।जिसमें पुलिस को कोर्ट की तरफ से ये सूचना दी गई है, कि FIR दर्ज कराने में ऊर्दू या फारसी भाषा का ऊपयोग ना किया जाए सरल भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए। जिससे कि सभी को पढ़ने में आसान हो, किसी दिक्कतों का सामना ना करना पड़ सके। इस पर अमल हुआ या नहीं। यह पता लगाने के लिए कोर्ट ने अगली सुनवाई तक पुलिस से एफआईआर की 100 कापीयां मंगाई थी। साथ ही इस मामले में हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है।

अगली सुनवाई 11 दिसंबर को होगी। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर सरल भाषा में होनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने सोमवार को कहा कि पुलिस को FIR दर्ज करने के दौरान उर्दू और फारसी के शब्दों के इस्तेमाल को रोकना चाहिए, जिनका बगैर सोचे समझे इस्तेमाल कर दिया जाता है।जिसको पढ़ने मे दिक्कते होती है। कोर्ट ने इसके पीछे यह दलील दिया कि लोग इन शब्दों को समझ नहीं पाएंगे. पीठ ने कहा कि FIR अदालत में बार- बार पढ़ी जाती है और इसलिए इसे सरल भाषा में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिये पुलिस के पास जो व्यक्ति FIR कराने आता है।

उसे सरल भाषा में दर्ज होना चाहिए ।जिसको कि वो खुद समझ सके। कोर्ट का ये आदेश एक वकील के याचिका दायर करने पर आया है और कोर्ट से अपील किया था कि पुलिस के पास जो भी इंसान FIR दर्ज कराने आता है। जिसको कि पुलिस ऊर्दू और फारसी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर लिखती है।

और लोगों को ये समझ और पढ़ने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।इन भाषाओं की बजाय सरल भाषाओँ का इस्तेमाल करना ज्यादा अच्छा हो सकता है। इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस को कोर्ट की तरफ से ये आदेश दिया गया था कि वो अपने एफआईआर में ऊर्दू, फारसी जैसे शब्दों का इस्तेमाल ना करे।इस मामले को लेकर 20 नवंबर को पुलिस ने सभी थानों को एक सर्कुलर भेजा था।जिसमें स्पष्ट बताया गया है कि FIR दर्ज करते समय इन भाषाओं के बजाए आसान शब्दों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। पुलिस ने कोर्ट को उर्दू और फारसी के ऐसे 383 शब्दों की लिस्ट सौंपी है। जिनका थानों में इस्तेमाल बंद हो चुका है।

जानकारी सही है या नहीं, ये पता लगाने के लिए कोर्ट ने अलग-अलग थानों से 10-10 एफआईआर की कापीयां मंगाई थी, ये देखने के लिए की कोर्ट के आदेशों का पालन हो रहा है या नही। इससे तो साफ तौर पर ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि अब भाषाओं का भी धर्म जात हो चुका है।

जहां पर दुनिया भर में ऊर्दू जैसी मीठी बोली जाती है लेकिन, भारत में उस ऊर्दू शब्द पर कोर्ट ने रोक लगा दिया है। ऊर्दू की मिठास जहां सदियों से ये शब्द बोले जा रहे वहां आज पढ़ने में दिक्कतों का सामना कर रही है।

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