यूपी: दलित छात्रों को अलग बैठाकर खिलाया जाता है मिड डे मील का खाना

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मुस्लिम मिरर स्टाफ़

नयी दिल्ली: यूं तो देश भर में दलितों के साथ अक्सर भेदभाव का मामला सामने आता ही रहता है, इस तर्ज पर अब ताज़ा मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से जहाँ एक प्राइमरी स्कूल में दलित छात्रों के साथ भेदभाव का मामला प्रकाश में आया है।

दरअसल, बलिया स्थित रामपुर स्कूल में सवर्ण (यानी ऊँची जाती के लोग) और दलित वर्ग के बच्चों को अलग बैठाकर मिड डे मील का खाना दिया जाता है। इतना ही नहीं बल्कि सवर्ण छात्र थाली भी अपने घर से लेकर आते हैं।

ये मामला तब प्रकाश में आया जब इस सम्बन्ध में एक विडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। वीडियो में दलित छात्रों से पूछा जा रहा है कि वह अलग बैठकर क्यों खाना खाते हैं। तो इस पर उनका कहना है कि, दूसरे छात्र उनको भगा देते हैं। वह अपने साथ बैठकर भोजन नहीं करने देते।

साथ ही इसके अलावा एक सामान्य वर्ग के छात्र ने भी विडियो में ये कबूला कि वह घर से अलग प्लेट लेकर आता है।

आपको बता दें कि इस विडियो के वायरल होने के बाद मामला टूल पकड़ने लगा और कुछ मीडिया हाउस ने जब इस मामले के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की तो शिक्षकों ने कहा कि बच्चे खुद अपनी मर्जी से अलग-अलग बैठ कर खाना खाते हैं, तथा स्कूल की तरफ से उन्हें अलग खाने के कोई आदेश नहीं हैं।

वहीँ इस संबंध में एक छात्र ने मीडिया को बताया कि कि वह अपने घर से खाने का बर्तन इसलिए लाता है क्यूंकि स्कूल में जिस प्लेट में खाना दिया जाता है उसमें रोज़ अलग अलग बच्चों को खाना दिया जाता है। छात्र ने बताया कि वो लोग ऐसी थाली में खाना नहीं खा सकते हैं इसलिए वे अपने घरों से बर्तन लाते हैं।

साथ ही जब इस बाबत स्कूल के प्रिंसिपल पुरुषोत्तम गुप्ता से पुछा गया तो उन्होंने कहा कि  ‘हम बच्चों को कहते हैं कि वे साथ बैठें और खाएं लेकिन वे लोग हमारी बात नहीं मानते।’

गुप्ता ने बताया कि, ‘चाहे घर से ऐसे संस्कार मिले हो या कोई और बात हो मगर ये छात्र दलित छात्रों के साथ बैठकर खाना नहीं खाना चाहते। कई बार हमने समझाने की कोशिश की लेकिन वह अलग ही खाते हैं।’


गौरतलब है कि जब इस मामले की जानकारी बसपा सुप्रीमो मायावती को लगी तो उन्होंने ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, “यूपी के बलिया जिले के सरकारी स्कूल में दलित छात्रों को अलग बैठाकर भोजन कराने की खबर अति-दुःखद व अति-निन्दनीय है। बीएसपी से मांग है कि ऐसे घिनौने जातिवादी भेदभाव के दोषियों के खिलाफ राज्य सरकार तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई करे ताकि दूसरों को इससे सबक मिले व इसकी पुनरावृति न हो”.

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