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गैंगेस्टर के नाम पर दलित, पिछड़े, मुसलमानों को मारी गई गोलियां

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हर एक नागरिक को जीने का अधिकार है, यह मौलिक अधिकार है। एनकाउंटर मतलब हत्या करना नहीं होता। हत्या करना संगीन जुर्म है और उसके लिए कानूनन सख्त सजा का प्रावधान है। हत्या करने का कोई कानून नहीं हो सकता इसलिए इसे किसी भी स्थिति में न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। सजा देने का अधिकार किसी सरकार को नहीं दिया जा सकता।

दरअसल खतौली मुज़फ्फरनगर के शहजाद को सहारनपुर में पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने पर परिजनों द्वारा सवाल उठाने के बाद रिहाई मंच के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाक़ात की। उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत के बाद नए भारत से बनेगा नया उत्तर प्रदेश कहते हुए मुठभेड़ के नाम पर हत्याओं का सिलसिला शुरू हुआ।

सामाजिक संगठन रिहाई मंच द्वारा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट दोनों राज्य सरकारों को छह महीने में यूपी की तर्ज पर अपराधियों के खिलाफ कड़ा कानून बनाकर उनका सफाया करने के निर्देश को हत्या करने का कानून बनाए जाने का लोकतंत्र विरोधी आदेश करार दिया।

हालांकि इस दौरान निर्देश में यूपी की तर्ज पर गैंगेस्टर एवं असामाजिक गतिविधियां (निरोधक) अधिनियम 1986 पारित करने को कहा गया।

इस मामले में रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि यह अदालती निर्देश ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में उसी कानून का सहारा लेकर पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों की इनकाउंटर में हत्याएं की जा रही हैं, नौजवानों को विकलांग बनाया जा रहा है। ऐसे कई मामलों की जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग कर रहा है और सुप्रीम कोर्ट में भी पीयूसीएल की याचिका विचाराधीन है। इससे आंख मूंद कर दिया गया पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का यह फैसला आपराधिक पुलिस मानसिकता को बढ़ावा देने वाला है।

उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था दुरूस्त करने के नाम पर अगर किसी क़ानून से संविधान और मौलिक अधिकारों की धज्जियां उड़े तो यह न्याय के हित में कतई नहीं है। ऐसा क़ानून मौलिक अधिकारों के खिलाफ राज्य का घातक हथियार होगा, राज्य प्रायोजित हत्याओं को वैधानिकता प्रदान करेगा और राज्य के हित में लोकतंत्र को बंधक बनाएगा।

उन्होंने कहा कि अपराधियों के सफाए के नाम पर उत्तर प्रदेश में हुए इनकाउंटर लोगों को जीने के अधिकार से वंचित करने और मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन किये जाने के मामले हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार योगी सरकार के ढाई सालों में कुल 3599 इनकाउंटर हुए। इनमें 73 मौतें हुईं और 1059 कथित अपराधी घायल हुए। तमाम मामलों में घुटने के नीचे बोरा बांध कर गोलियां मारी गईं। कुल 8251 अपराधियों को गिरफ्तार करने का दावा किया गया। इसके बावजूद प्रदेश में अपराधों में वृद्धि लगातार जारी है। मतलब यह कि अपराध मुक्ति का सरकारी अभियान अपराधियों के खिलाफ कहने भर को है। इरादा तो दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध लेना है। उत्तर प्रदेश का उदाहरण देकर कानून बनाने और अपराधियों का सफाया करने की बात कहना सत्ताधारी दल से जुड़े अपराधियों को संरक्षण और संगठित अपराध को बढ़ावा देना है। यह राजनीतिक विरोधियों के दमन को कानूनी लबादे में जायज ठहराने जैसा है।

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हरियाणा: सीएम मनोहर लाल खट्टर का ऐलान, हरियाणा में भी लागू होगा एनआरसी

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मुस्लिम मिरर स्टाफ़

नयी दिल्ली: राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) की अंतिम सूची आने के बाद जहाँ एक तरफ विवाद ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं वहीँ इसी बीच अब हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने घोषणा की है कि, असम के बाद अब उनके राज्‍य में भी एनआरसी लागू किया जाएगा।

ये बात मुख्यमंत्री खट्टर ने रविवार को अपनी सरकार के पिछले पांच सालों के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान कही।

इसके अलावा खट्टर ने बताया कि हरियाणा में कानून आयोग के गठन करने पर भी विचार किया जा रहा है अवं समाज के प्रबुद्ध व्यक्तियों की सेवाएं लेने के लिए अलग से एक स्वैच्छिक विभाग का गठन किया जाएगा।

एनआरसी पे खट्टर ने कहा कि, परिवार पहचान पत्र पर हरियाणा सरकार तेजी से काम कर रही है और इसके आंकड़ों का उपयोग राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में भी किया जाएगा।

गौरतलब है कि, उन्होंने न्यायमूर्ति एचएस भल्ला के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि, भल्ला रिटायर होने के बाद भी एनआरसी डाटा का अध्ययन करने के लिए असम के दौरे पर जा रहे हैं और ये अपने आप में सराहनीय है।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मनोहर लाल ने अपनी सरकार के पिछले पांच वर्षों पर कहा कि, उनका उद्देश्य सरकार द्वारा पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल में किए गए कार्यों की जानकारी लोगों तक पंहुचाना है। इसके अलावा उनकी सरकार आने वाले समय में क्या करेगी, इसके बारे भी वह प्रबुद्ध लोगों से सुझाव् ले रहे है। उन्होंने कहा कि, किसी भी अच्छे सुझाव को वो अपने संकल्प पत्र में शामिल भी कर सकते है।

खट्टर के मुताबिक उनकी सरकार ये सुनिश्चित करेगी के विकास कार्यों का ऑडिट समाज के प्रबुद्ध द्वारा ही हो अतः इसके लिए वो सोशल ऑडिट सिस्टम लागू करेंगे. इस ऑडिट के अनुसार ऐसे कार्यों में भूतपूर्व सैनिक, अध्यापक, इंजिनियर या किसी अन्य प्रकार की विशेष उपलब्धि प्राप्त करने वाले लोगों को ही शामिल किया जाएगा।

आपको बता दें कि, कुछ सप्ताह पूर्व ही असम में हुई एनआरसी की अंतिम सूची आई आई थी जिसमें तकरीबन 19 लाख लोगों को इस सूची से बहार कर दिया था, जिसके बाद काफी आलोचना और विवाद हुए. यहाँ तक की अक्सर एनआरसी की पैरवी करने वाली भाजपा ने अंतिम सूची के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का फैसला किया है.

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दिल्ली: आदर्श नगर में नाबालिक मुस्लिम लड़के को भीड़ ने पीट पीटकर मार डाला

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Muslim Mirror Staff

नई दिल्ली: आये दिन हो रही भीड़ हत्याओं में अब सबसे चौंकाने वाला मामला दिल्ली के आदर्श नगर इलाके से सामने आया है, जहाँ एक नाबालिग मुस्लिम लड़के की भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या कर दी गयी है।

दरअसल, घटना शुक्रवार सुबह हुई जब 15 वर्षीय साहिल नामक लड़के को इसलिए पीट पीट कर मार दिया गया क्यूंकि कथित तौर पर वो चोरी करने के लिए अपने पड़ोसी मुकेश के घर में घुस गया था।

वहीँ इस मामले में पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है और इस संधर्भ में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

ये घटना उस वक़्त हुई जब शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे साहिल अपने पड़ोसी के घर में घुस गया, और कुछ असामान्य गतिविधि को देखते हुए मुकेश नींद से जाग गए और उन्होंने साहिल को देखा जो चोरी के इरादे से कथित रूप से घर के अंदर प्रवेश कर चुका था। मुकेश के चिल्लाने पर लोग इकट्ठा हुए और साहिल की पिटाई करने लगे और उसके बाद पुलिस को बुलाया गया।

पुलिस के पहुंचने के तुरंत बाद, उन्होंने लड़के को जगजीवन राम अस्पताल में भर्ती कराया, जो भीड़ द्वारा पिटाई के बाद बेरहमी से घायल हो गए था। लेकिन, साहिल की हालत बिगड़ने लगी। पुलिस ने घर के मालिक मुकेश के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है और उसे हिरासत में ले लिया है।

वहीँ साहिल ने शुक्रवार शाम को अंतिम सांस ली;  इसलिए पुलिस ने मुकेश के खिलाफ लगाए गए आरोपों को बदल दिया।

इस घटना पर बयान देते हुए, लड़के के परिवार के सदस्य ने कहा, “उन्होंने हमारे लड़के को 2 बजे पीटना शुरू कर दिया और सुबह 6 बजे तक उसकी पिटाई करते रहे। मेरा एक 15 साल का बेटा साहिल ही था, जो हमारा घर चलाने में मदद करता था। अब उसकी 2 बहनों और 3 भाइयों को अब कौन खिलाएगा? ”

“जब हमने 8:30 बजे उसे उठाया, तो वह साँस लेने की बहुत कोशिश कर रहा था। उन्होंने सुबह उसे पटरियों पर फेंकने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में उसे किसी तरह छोड़ दिया। हम इन सभी लोगों को जानते हैं और उन्होंने मेरे बेटे का जीवन छीन लिया है ”परिवार के सदस्य ने कहा।

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मुस्लिम बहुल इलाकों से चुन कर आए हुए लोकसभा सदस्यों से एक आम मुस्लमान का सवाल 

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मुस्लिम बहुल इलाकों से चुन कर आए हुए माननीय लोकसभा सदस्य,

अस्सलामो अलैकुम !

आपको हमने इसलिए चुना है कि आप हमारी आवाज़ बनेंगे और हमारी समस्याओं के प्रति सरकार को सजग कराते रहेंगे। निरंतर और प्रभावशाली प्रयास करेंगे । परंतु हम कई दशकों से देखते आ रहे हैं कि तमाम मुस्लिम नेता चुनाव के समय जोशीला और भावनात्मक भाषण देकर हमारा वोट तो हासिल कर लेते हैं लेकिन जीतने के बाद हमारे गंभीर मुद्दों पर चुप्पी साध लेते हैं। लेकिन हर चीज़ की एक सीमा होती है। हम मुकदर्शक बने नहीं रह सकते। बीजेपी और संघ के डर से आपको बहुत लंबे समय तक वोट नहीं दे सकते। अब आपको अपनी जिम्मेदारी निर्वहन करना ही होगा। और आप अपनी जिम्मेदारियों का कितना निर्वहन कर रहे हैं निम्नलिखित सवालों के जवाब से हमें बताने का कष्ट करें!

  1. आप लिंचिग के विरोध में कौन कौन सा कदम अभी तक उठाए हैं या उठा रहे हैं या उठाने वाले हैं?
  2. क्या आप लिंचिंग के विरोध में किसी तरह का कोई धरना प्रदर्शन या भूख हड़ताल किए हैं ? क्या आप लिंचिंग के विरोध में सड़कों पर कभी उतरे हैं?
  3.  क्या आपने लिंचिंग को रोकने के लिए एक सख्त कानून व्यवस्था लाने की सरकार से मांग किए हैं?  या क्या आप इस मांग के लिए अनिश्चित काल के लिए भूख हड़ताल पर कभी बैठे हैं?आपकी यह मांग सरकार मान ले इसके लिए आप कौन सा प्रभावशाली कदम उठाएं हैं या उठाने वाले हैं?
  4. क्या हम ऐसे ही बीजेपी के डर से आपको वोट देते रहें ताकि आप पांच साल एसी कमरों में बिरयानी और कोरमा तोड़े ? या आप लोगों की नपुंसकता को देखते हुए हम लोग भी अब बीजेपी को ही विकल्प बना लें?
  5. जब हमें ही सड़कों पर उतरना है और हमें स्वयं ही अपनी लड़ाई लड़नी है तो हम आपकी जगह बीजेपी को ही वोट क्यूँ न दें? हो सकता है बीजेपी के दिल में ही हमारे लिए ममता जाग जाए? हम आप जैसे नपुंसक नेताओं की जगह दुश्मन को ही दोस्त क्यूं नहीं बना लें
  6. क्या कांग्रेस, सपा, बसपा ,राजद जैसी तथाकथित सेकुलर दल हमारे हितों की रक्षा करती है या हमारे लिए आवाज़ बन सकती है? यदि ऐसा नहीं है तो फिर आप इन दलों को क्यूँ नहीं छोड़ देते? क्या यह सच नहीं है कि आप अपनी निजी स्वार्थों के लिए इन तथाकथित सेकुलर दलों का गुणगान करते हैं?
  7. क्या आप यह मानते हैं कि तथाकथित सेकुलर दलों में आपमात्र एक मुखौटा भर हैं फिर आप किस मुंह से हमसे वोट मांगते हैं ?  और फिर हम वोट देने वालों में और मोदी भक्त में क्या फर्क रह जाता है? मोदी भक्त भी बिना कारण वोट दे रहे हैं और हम भी आपको बिना किसी काम के।
  8. मुस्लिम बहुल इलाकों से मुस्लिम विधायक और सांसद चुने जाने के बावजूद आंकडे़ बताते हैं कि मुस्लिम बहुल इलाकों में स्कूल से लेकर अस्पतालों का भारी अकाल है । तो क्या यह सच नहीं है कि आप तथाकथित सेकुलर दलों के एजेंट के तौर पर सदियों से काम करते आ रहे हैं और आज भी उनके ही एजेंडों को ढो रहे हैं? यानी आपको हमारे विकास से कोई सरोकार नहीं है क्योंकि आप यह जानते हैं कि हम आपको बीजेपी के डर से वोट दे ही देते हैं।
  9. हज कमेटी से लेकर वक्फ बोर्ड , उर्दू एकादमी,मदरसा बोर्ड आदि में सौ फीसदी आप मुस्लिम नेताओं को ही नेतृत्व रहा है फिर भी यह सभी विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है। आप इनके खिलाफ कौन सा कदम उठाएं हैं और इन विभागों को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए क्या कर रहे हैं?
  10. क्या आप यह मानते हैं कि देश में वोटों का पोलराईजेशन हो गया है और अब तथाकथित सेकुलर दलों का कोई भविष्य नहीं है? और ऐसी परिस्थिति में क्या हमें अपना नेतृत्व खड़ा करना चाहिए?

धन्यवाद

मुहम्मद वजहुल कमर

(एक आम नागरिक)

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