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क्या मुस्लिम सांसदों का प्रतिनिधित्व घटा रही सेक्युलर पार्टियां…?

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By Muslim Mirror Staff-reporter

लोकसभा चुनाव 2019 अपने बीच पड़ाव में आ चुकी है जिसमें बिहार मधुबनी सीट को लेकर राजद और कांग्रेस नेताओं में कई मतभेद और नाराज़गी भी देखा गया. दरभंगा से सांसद रहे फातमी मधुबनी सीट से टिकट नहीं मिलने से नाराज चल रहे थे. इसकी वजह महागठबंधन के सहयोगी दल वीआईपी ने बद्री दूबे को मधुबनी से उम्मीदवार बनाना रहा.

वही बिहार में महागठबंधन के घटक दलों के बीच चुनावी तालमेल से नाराज़ और मधुबनी सीट पर पार्टी के निर्णय के खिलाफ जा कर चुनाव लड़ने वाले डॉ शकील अहमद को कांग्रेस ने निलंबित कर दिया छठे चरण तक कांग्रेस के स्टार प्रचारक रहे डॉ शकील अहमद का नाम सातवें चरण में हटा दिया गया. हालांकि उन्होंने इस चुनाव में किसी भी कांग्रेस प्रत्याशी के लिए प्रचार नहीं किया.

मधुबनी लोकसभा सीट से सांसद रहे डॉ शकील अहमद को ये मलाल था कि पार्टी ने इस सीट पर तालमेल के लिए महागठबंधन के बीच सही तरीके से अपनी बातों को नहीं रखा. हालांकि कांग्रेस के लिए डॉ शकील अहमद को मुस्लिम फेस माने जाते रहे हैं.

शकील अहमद 1998 और 2004 में मधुबनी सीट से लोकसभा सदस्य रहे थे. वे 1985, 1990 और 2000 में विधायक चुने गए थे. शकील ने राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कार्य किया तथा 2004 में केंद्र में सत्तासीन रहे मनमोहन सिंह की सरकार में संचार, आईटी और गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे.

दरअसल मो अली अशरफ फातमी और डॉ शकील अहमद को मुसलमानों का समर्थन हासिल है. पार्टी से टिकट नहीं मिलने से मुसलमानो में इसको लेकर काफी नाराज़गी है. लोगों की माने तो टिकट ना देकर इस सीट पर मुस्लिम लीडरशिप को ख़त्म करने की साज़िश माना जा रहा है.

मधुबनी के रहने वाले 34 वर्षीय वकाश हुसैन पेशे से वकील हैं उन्होंने Muslim Mirror से बताया कि जिस तरह से महागठबंधन ने इन सीटों पर अपने फायदे के लिए मुस्लिम नेतृत्यों को ख़त्म किया है. भाजपा हो या कांग्रेस ये कभी भी मुस्लिम का भला नहीं कर सकती।

पटना के रहने वाले मौलाना खुर्शीद अली कहते हैं कि केंद्रीय मंत्री रहे शकील अहमद के दादा और पिता दोनों ही कांग्रेस के विधायक रह चुके है ऐसे में कांग्रेस उनको सीट ना देकर अपने ही पार्टी के सदस्य से गद्दारी कर गई. मुस्लिम समाज में पहले ही प्रतिनिधित्व करने वालों की कमी रही है ऐसे में इस तरह से लिया गया फैसला सिर्फ धोखा देने जैसा है.

हाजी इक़बाल का कहना है कि मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक के तौर पर समझा जाता रहा है, ये बात मुसलमानों को हर हाल में समझना चाहिए। विधानसभा के चुनाव के बाद भी ठीक ऐसा ही हुआ था अब्दुल बारी अली सिद्दीकी को डिप्टी सीएम बनने की बात थी लेकिन ऐन वक़्त पर तेजस्वी को इसका नेतृत्व सौंप दिया गया. वोट मांगने से अब मुस्लिम वोट नहीं करेंगे सभी पार्टियों को ये समझना होगा कि मुस्लिम वोट के लिए मुसलमानों को टिकट देना भी ज़रूरी है.

बताते चले कि बिहार में 40 लोकसभा में कांग्रेस, राजद गठबंधन ने 40 में से सात सीटों पर मुसलमानों को टिकट दिया है जबिक बीजेपी-जदयू ने सिर्फ़ एक मुसलमान को टिकट दिया है.

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दिल्ली वक्फ़ बोर्ड ने JNU से लापता छात्र नजीब अहमद की माँ को दी 5 लाख की मदद, भाई को दी नौकरी

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मुस्लिम मिरर स्टाफ

नई दिल्ली: सोमवार को दिल्ली वक्फ ने जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद के परिवार को 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता तथा नजीब के भाई को नौकरी दी.

नजीब के परिवार को ये सहायता ओखला से एमएलए व् दिल्ली वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अमानतुल्ला खान ने दी.

इस बात की जानकारी साझा करते हुए खुद अमनातुल्लाह खान ने अपनी फेसबुक वाल पे लिखा, ” अल्हम्दुलिल्लाह, आज हमने दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड में 3 साल पहले JNU से ग़ायब छात्र नजीब की माँ को 5 लाख रुपए की मदद और नजीब के भाई हसीब को पक्की नौकरी दी, और अन्य 200 ज़रूरतमंद परिवारों की मदद की ”

गौरतलब है कि, 15 अक्टूबर वर्ष 2016 को नजीब अहमद नामक छात्र  दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के माही-मांडवी छात्रावास से लापता हो गए थे. बताया जाता है कि, जिस रात नजीब अहमद लापता हुए उससे पहले कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कुछ छात्रों ने उनके साथ मारपीट की थी।

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हरियाणा: सीएम मनोहर लाल खट्टर का ऐलान, हरियाणा में भी लागू होगा एनआरसी

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मुस्लिम मिरर स्टाफ़

नयी दिल्ली: राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) की अंतिम सूची आने के बाद जहाँ एक तरफ विवाद ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं वहीँ इसी बीच अब हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने घोषणा की है कि, असम के बाद अब उनके राज्‍य में भी एनआरसी लागू किया जाएगा।

ये बात मुख्यमंत्री खट्टर ने रविवार को अपनी सरकार के पिछले पांच सालों के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान कही।

इसके अलावा खट्टर ने बताया कि हरियाणा में कानून आयोग के गठन करने पर भी विचार किया जा रहा है अवं समाज के प्रबुद्ध व्यक्तियों की सेवाएं लेने के लिए अलग से एक स्वैच्छिक विभाग का गठन किया जाएगा।

एनआरसी पे खट्टर ने कहा कि, परिवार पहचान पत्र पर हरियाणा सरकार तेजी से काम कर रही है और इसके आंकड़ों का उपयोग राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में भी किया जाएगा।

गौरतलब है कि, उन्होंने न्यायमूर्ति एचएस भल्ला के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि, भल्ला रिटायर होने के बाद भी एनआरसी डाटा का अध्ययन करने के लिए असम के दौरे पर जा रहे हैं और ये अपने आप में सराहनीय है।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मनोहर लाल ने अपनी सरकार के पिछले पांच वर्षों पर कहा कि, उनका उद्देश्य सरकार द्वारा पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल में किए गए कार्यों की जानकारी लोगों तक पंहुचाना है। इसके अलावा उनकी सरकार आने वाले समय में क्या करेगी, इसके बारे भी वह प्रबुद्ध लोगों से सुझाव् ले रहे है। उन्होंने कहा कि, किसी भी अच्छे सुझाव को वो अपने संकल्प पत्र में शामिल भी कर सकते है।

खट्टर के मुताबिक उनकी सरकार ये सुनिश्चित करेगी के विकास कार्यों का ऑडिट समाज के प्रबुद्ध द्वारा ही हो अतः इसके लिए वो सोशल ऑडिट सिस्टम लागू करेंगे. इस ऑडिट के अनुसार ऐसे कार्यों में भूतपूर्व सैनिक, अध्यापक, इंजिनियर या किसी अन्य प्रकार की विशेष उपलब्धि प्राप्त करने वाले लोगों को ही शामिल किया जाएगा।

आपको बता दें कि, कुछ सप्ताह पूर्व ही असम में हुई एनआरसी की अंतिम सूची आई आई थी जिसमें तकरीबन 19 लाख लोगों को इस सूची से बहार कर दिया था, जिसके बाद काफी आलोचना और विवाद हुए. यहाँ तक की अक्सर एनआरसी की पैरवी करने वाली भाजपा ने अंतिम सूची के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का फैसला किया है.

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मुस्लिम बहुल इलाकों से चुन कर आए हुए लोकसभा सदस्यों से एक आम मुस्लमान का सवाल 

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मुस्लिम बहुल इलाकों से चुन कर आए हुए माननीय लोकसभा सदस्य,

अस्सलामो अलैकुम !

आपको हमने इसलिए चुना है कि आप हमारी आवाज़ बनेंगे और हमारी समस्याओं के प्रति सरकार को सजग कराते रहेंगे। निरंतर और प्रभावशाली प्रयास करेंगे । परंतु हम कई दशकों से देखते आ रहे हैं कि तमाम मुस्लिम नेता चुनाव के समय जोशीला और भावनात्मक भाषण देकर हमारा वोट तो हासिल कर लेते हैं लेकिन जीतने के बाद हमारे गंभीर मुद्दों पर चुप्पी साध लेते हैं। लेकिन हर चीज़ की एक सीमा होती है। हम मुकदर्शक बने नहीं रह सकते। बीजेपी और संघ के डर से आपको बहुत लंबे समय तक वोट नहीं दे सकते। अब आपको अपनी जिम्मेदारी निर्वहन करना ही होगा। और आप अपनी जिम्मेदारियों का कितना निर्वहन कर रहे हैं निम्नलिखित सवालों के जवाब से हमें बताने का कष्ट करें!

  1. आप लिंचिग के विरोध में कौन कौन सा कदम अभी तक उठाए हैं या उठा रहे हैं या उठाने वाले हैं?
  2. क्या आप लिंचिंग के विरोध में किसी तरह का कोई धरना प्रदर्शन या भूख हड़ताल किए हैं ? क्या आप लिंचिंग के विरोध में सड़कों पर कभी उतरे हैं?
  3.  क्या आपने लिंचिंग को रोकने के लिए एक सख्त कानून व्यवस्था लाने की सरकार से मांग किए हैं?  या क्या आप इस मांग के लिए अनिश्चित काल के लिए भूख हड़ताल पर कभी बैठे हैं?आपकी यह मांग सरकार मान ले इसके लिए आप कौन सा प्रभावशाली कदम उठाएं हैं या उठाने वाले हैं?
  4. क्या हम ऐसे ही बीजेपी के डर से आपको वोट देते रहें ताकि आप पांच साल एसी कमरों में बिरयानी और कोरमा तोड़े ? या आप लोगों की नपुंसकता को देखते हुए हम लोग भी अब बीजेपी को ही विकल्प बना लें?
  5. जब हमें ही सड़कों पर उतरना है और हमें स्वयं ही अपनी लड़ाई लड़नी है तो हम आपकी जगह बीजेपी को ही वोट क्यूँ न दें? हो सकता है बीजेपी के दिल में ही हमारे लिए ममता जाग जाए? हम आप जैसे नपुंसक नेताओं की जगह दुश्मन को ही दोस्त क्यूं नहीं बना लें
  6. क्या कांग्रेस, सपा, बसपा ,राजद जैसी तथाकथित सेकुलर दल हमारे हितों की रक्षा करती है या हमारे लिए आवाज़ बन सकती है? यदि ऐसा नहीं है तो फिर आप इन दलों को क्यूँ नहीं छोड़ देते? क्या यह सच नहीं है कि आप अपनी निजी स्वार्थों के लिए इन तथाकथित सेकुलर दलों का गुणगान करते हैं?
  7. क्या आप यह मानते हैं कि तथाकथित सेकुलर दलों में आपमात्र एक मुखौटा भर हैं फिर आप किस मुंह से हमसे वोट मांगते हैं ?  और फिर हम वोट देने वालों में और मोदी भक्त में क्या फर्क रह जाता है? मोदी भक्त भी बिना कारण वोट दे रहे हैं और हम भी आपको बिना किसी काम के।
  8. मुस्लिम बहुल इलाकों से मुस्लिम विधायक और सांसद चुने जाने के बावजूद आंकडे़ बताते हैं कि मुस्लिम बहुल इलाकों में स्कूल से लेकर अस्पतालों का भारी अकाल है । तो क्या यह सच नहीं है कि आप तथाकथित सेकुलर दलों के एजेंट के तौर पर सदियों से काम करते आ रहे हैं और आज भी उनके ही एजेंडों को ढो रहे हैं? यानी आपको हमारे विकास से कोई सरोकार नहीं है क्योंकि आप यह जानते हैं कि हम आपको बीजेपी के डर से वोट दे ही देते हैं।
  9. हज कमेटी से लेकर वक्फ बोर्ड , उर्दू एकादमी,मदरसा बोर्ड आदि में सौ फीसदी आप मुस्लिम नेताओं को ही नेतृत्व रहा है फिर भी यह सभी विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है। आप इनके खिलाफ कौन सा कदम उठाएं हैं और इन विभागों को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए क्या कर रहे हैं?
  10. क्या आप यह मानते हैं कि देश में वोटों का पोलराईजेशन हो गया है और अब तथाकथित सेकुलर दलों का कोई भविष्य नहीं है? और ऐसी परिस्थिति में क्या हमें अपना नेतृत्व खड़ा करना चाहिए?

धन्यवाद

मुहम्मद वजहुल कमर

(एक आम नागरिक)

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यूपी में बंद नहीं हो रहा पत्रकारों से बदसलूकी

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उतर प्रदेश के मुरादाबाद जिला अस्पताल के निरीक्षण पर भाजपा के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के दौरे से एक नया विवाद खड़ा हो गया।

स्थानीय पत्रकारों ने आरोप लगाया की मुख्यमंत्री के आने पर हम लोगों को एक कमरे में बन्द कर दिया गया था। ताकि वे योगी से कठिन सवाल न पूछ सकें। मीडिया कर्मी कवरेज करने से रोके जाने पर हंगामा खड़ा कर दिया और पुलिस से नोक-झोक भी हुई।

इस पर जिलधिकारी संजय कुमार प्रतिक्रिया देते हुए सीएम के निरीक्षण के दौरान काफी संख्या में मीडिया के लोग अस्पताल पहुंच गए। उनसे आग्रह किया गया कि मुख्यमंत्री के साथ इतनी संख्या में लोगों का वार्ड में आना मरीजों की सेहत के लिहाज से ठीक नहीं है।

मीडिया खबरों के उन्होंने कहा कि मीडिया वाले एक कमरे में थे जबकि कुछ वार्ड में। सीएम का दौरा होते ही सभी लोग बाहर आ गए थे। कमरे में ताला बंद करने जैसी बात गलत है।

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अगर मुस्लिम गटर में हैं, तो मोदी सरकार ऊपर उठाइए: ओवैसी

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By MM Hindi News

नई दिल्ली : संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर आल इंडिया मजलिस-इ-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि मोदी जी को शाहबानो याद है, हालांकि अखलाक याद नहीं है। भूतपूर्व पीएम नरसिम्हा राव की सरकार के दौरान ही बाबरी मस्जिद गिरी थी और अगर हम गटर में हैं, तो हमें गटर से ऊपर उठाइए।

बता दें कि न्यूज़ ट्रैक पर छपी खबर के अनुसार, मंगलवार को अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस की केंद्र सरकार में मंत्री रहे एक नेता के बयान का उदाहरण देते हुए सदन में बताया गया कि कांग्रेस के मंत्री ने खुद यह कहा है कि कांग्रेस यह मानती है मुसलमानों के उत्थान की जिम्मेदारी उसकी कतई नहीं है, अगर वो गटर में पड़े रहना चाहते हैं तो उन्हें पड़े रहने दो। मंगलवार को सदन में इस दौरान हंगामा भी हो गया था.

यहां तक की पीएम ने इंटरव्यू का यूट्यूब लिंक साझा करने तक की बात भी कही थी। पीएम द्वारा कांग्रेस के जिस पूर्व मंत्री के इंटरव्यू का जिक्र किया गया है, उस इंटरव्यू में उन्होंने (आरिफ मोहम्मद खान) दावा किया है कि, ‘नरसिम्हा राव जी द्वारा खुद मुझसे यह कहा है कि ये (मुसलमान) हमारे वोटर हैं, हम इन्हें क्यों नाराज करें। हम इनके सामाजिक सुधारक कतई नहीं हैं। कांग्रेस पार्टी समाज सुधार का काम भी नहीं कर रही है।

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BJP और RSS ने घोल दी मुसलमानों के खिलाफ नफरत: ओवैसी

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By Muslim Mirror Staff-reporter

नई दिल्ली : भारत में हिंसक हिंदू चरमपंथी समूहों द्वारा अल्पसंख्यकों पर हमले जारी रिपोर्ट को जहाँ भारत ने इस रिपोर्ट को खारिज किया वही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि एक विदेशी संस्था द्वारा हमारे नागरिकों के संविधान संरक्षित अधिकारों की स्थिति पर टिप्पणी करने का कोई औचित्य नहीं है.

इस रिपोर्ट को ख़ारिज के कुछ ही घंटे बाद झारखंड में ‘मॉब लिंचिंग’ के बाद अस्पताल में मुस्लिम युवक की मौत की खबर पूरी मीडिया द्वारा सामने आया वही इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ.

इस घटना के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मॉब लिंचिंग की घटनाएं नहीं रुक सकती क्योंकि बीजेपी और आरएसएस ने लोगों के दिमाग में मुस्लिमों के प्रति नफरत की भावना बढ़ा दी है.

अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन के प्रमुख ने मीडिया से कहा, ‘ये घटनाएं हमेशा मोदी को डराएंगी, क्योंकि प्रधानमंत्री के रूप में वे इसे रोक नहीं सके.’

हालांकि देश में हो रही लगातार मॉब लिंचिंग के घटनाओ को लेकर ओवैसी पहले भी बीजेपी, नरेंद्र मोदी और आरएसएस पर सवाल उठाते रहे हैं. अभी हाल में उन्होंने कहा कि ‘पीट-पीट कर मार डालना (मॉब लिंचिंग) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विरासत है. मोदी को भारतीय इतिहास में मॉब लिंचिंग के लिए याद रखा जाएगा, क्योंकि उनके कार्यकाल में इस तरह की सबसे ज्यादा घटनाएं हुई हैं.

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अखिलेश नहीं चाहते थे मुस्लिमों को अधिक टिकट: मायावती

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By Muslim Mirror Staff-reporter 

नई दिल्ली : चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न करने पर समाजवादी पार्टी (SP) से बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने पूरी तरह गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया। रविवार को BSP की अखिल भारतीय बैठक में मायावती ने कहा कि SP के साथ चुनाव लड़ना सबसे बड़ी भूल तक बता दी।

रविवार को उन्होंने कहा, अखिलेश नहीं चाहते थे कि गठबंधन मुस्लिमों को ज्यादा टिकट दे। उनका मानना था कि इससे वोटों का ध्रुवीकरण होता और भाजपा को फायदा मिलता।

लखनऊ में पार्टी नेताओं की बैठक में मायावती ने गठबंधन टूटने की वजह गिनाईं। अखिलेश पर हार का ठीकरा फोड़ते हुए उन्होंने कहा कि यादवों ने गठबंधन को वोट नहीं दिए। यदि पूरे वोट गठबंधन को मिलते तो सपा बदायूं, फिरोजाबाद और कन्नौज जैसी सीटें कभी न हारती। मायावती ने कहा कि चुनाव नतीजों के बाद अखिलेश मिलने नहीं आए। यह उनकी अपरिपक्वता दिखाता है। साथ ही अब अकेले लड़ने की बात कही।

इतना ही नहीं मायावती ने भाई आंनद कुमार और भतीजे आकाश कुमार को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। आनंद को एक बार फिर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, भतीजे आकाश के साथ अपने करीबी रामजी गौतम को राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त किया गया है। बसपा सुप्रीमो ने लोकसभा में नेता कुंवर दानिश अली और राज्यसभा में नेता सतीश चंद्र मिश्र को विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

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महिला को छोड़ने पर गैर-मुस्लिम को एक साल, मुस्लिम पति को 3 साल सजा…बिल संविधान के खिला -असदुद्दीन ओवैसी

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केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस बिल को लोकसभा में पेश किया। दरअसल पिछले महीने 16 वीं लोकसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद पिछला विधेयक निष्प्रभावी हो गया था क्योंकि यह राज्यसभा में लंबित था। फौरी तीन तलाक पर तुरंत प्रतिबंध लगाने और IPC में दंडनीय अपराध बनाने वाला बिल विपक्ष के जोरदार विरोध के बावजूद फिर संसद में है। मोदी सरकार ने 17वीं लोकसभा के पहले विधेयक के रूप में इसे पेश कर साफ कर दिया कि वह अपनी प्राथमिकताओं और खास अजेंडों को आगे बढ़ाने से पीछे नहीं हटेगी।

कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों ने तीन तलाक बिल को सदन के पटल पर रखे जाने का विरोध किया। कांग्रेस पार्टी की तरफ से सांसद शशि थरूर ने बिल के पेश होने का विरोध किया।

उन्होंने कहा कि मैं तीन तलाक का बचाव नहीं करता, मगर इस बिल का विरोध जरूर करता हूं। इस बिल में कई खामिया हैं। जिसको दूर करने के लिए इस बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार की नजर में तलाक देकर पत्नी को छोड़ देना गुनाह है, तो ये सिर्फ मुस्लिम समुदाय तक ही सीमित क्यों है। उन्होंने कहा कि क्यों ना इस कानून को सभी समुदाय के लिए लागू किया जाना चाहिए। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि सरकार इस बिल के जरिए मुस्लिम महिलाओं को फायदा नहीं पहुंचा रही है बल्कि सिर्फ मुस्लिम पुरुषों को ही सजा दी रही है।

विपक्ष ने इसे असंवैधानिक और भेदभाव वाला बताकर विरोध किया। ओवैसी ने कहा कि सरकार को जितनी हमदर्दी मुस्लिम महिलाओं से है, उतनी ही केरल के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर भी होनी चाहिए। ओवैसी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि तीन तलाक बिल से सिर्फ मुस्लिम पुरुषों को सजा मिलेगी। महिला को छोड़ने पर गैर-मुस्लिम को एक साल, मुस्लिम पति को तीन साल सजा…बिल संविधान के खिलाफ है।

लोकसभा में पेश तीन तलाक संबंधी बिल पर मुस्लिम संगठनों की राय अलग-अलग है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता जफरयाब जीलानी ने विधेयक को मुस्लिम महिला और उसके बच्चों के भविष्य को बर्बाद करने वाला, शरीयत विरोधी, संविधान विरोधी, सुप्रीम कोर्ट की मंशा विरोधी करार दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट की मंशा विरोधी करार दिया। वहीं ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड इस विधेयक के पूरी तरह समर्थन में उतरा है।

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प्रधानमंत्री की ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पिछले दरवाजे से राष्ट्रपति शासन लाने की कोशिश?

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नई दिल्लीः ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के केंद्र सरकार के विचार को असंवैधानिक तथा संघीय व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए माकपा ने बुधवार को आरोप लगाया कि यह देश में संसदीय प्रणाली की जगह पिछले दरवाजे से राष्ट्रपति शासन लाने की कोशिश है।

सर्वदलीय बैठक में भाग लेने और सभा को संबोधित करते हुए सीताराम येचुरी ने कहा, ‘‘यह विचार असंवैधानिक और संघीय व्यवस्था के खिलाफ है।” उन्होंने कहा कि पहले भी एक साथ चुनाव हुए थे लेकिन अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग किया गया। जब तक अनुच्छेद 356 रहेगा तब तक एक साथ चुनाव नहीं हो सकते।

येचुरी के अनुसार फिलहाल की व्यवस्था में एक साथ चुनाव संभव नहीं हैं। संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत केन्द्र कुछ आपात स्थितियों में राज्य की चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा सकता है।

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संसद में भाजपा विधायकों के ‘नारे’ की मनमानी

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पिछले दो दिन से जहां नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ लेने का क्रम जारी है। अधिकांश भाजपा सांसदों ने शपथ ग्रहण के समय ‘जय श्रीराम’, ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और लखीमपुर खीरी के भाजपा सांसद अजय कुमार के बीच व्यंग्य का आदान-प्रदान जैसा होता दिखा, जब कुमार ने ‘जय श्रीराम’, ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हस्तक्षेप किया और राहुल को इशारा कर कोई टिप्पणी नहीं करने के लिए कहा।

वही शपथ लेते वक्त समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान ने ‘वंदे मातरम’ कहने से इनकार कर दिया, उन्होंने इसे ‘इस्लाम के खिलाफ’ करार दिया है। उत्तर प्रदेश के संभल से चुनाव जीतने वाले शफीकुर्रहमान ने शपथ लेने के बाद कहा, ‘जहां तक वंद मातरम का ताल्लुक है, यह इस्लाम के खिलाफ है और हम इसे नहीं मान सकते।’

इसके बाद सदन में मौजूद अन्य नेताओं ने ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। इतना ही नहीं AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी शपथ लेने आए तो भाजपा सांसदों ने ‘जय श्री राम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। इस बीच ओवैसी ने सांसदों से और अधिक नारे लगाने को कहा। जवाब में जब उन्होंने खुद शपथ ली, तो ‘अल्लाह हू अकबर’, ‘जय भीम’ और ‘जय हिंद’ का नारा लगाया।

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