इंदौर के स्कूल ने मुस्लिम छात्रों को बैठाया स्कूल से बाहर

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हिंदी भाषा के दैनिक दोपहर समाचार पत्र ने बताया कि मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के नवलखा इलाके में स्थित “बंगाली स्कूल” के 12 वीं कक्षा की मुस्लिम छात्रों को अपने परीक्षा हॉल में प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिली.

मामला बुधवार का है, वहीँ छात्रों को अपने कागजात लिखने के लिए बरामदे में बैठने के लिए मजबूर किया गया. ये छात्र 12 वीं की परीक्षा दे रहे थे.

स्कूल की ओर से तय समय पर छात्र जब परीक्षा हॉल की तरफ बढ़े तो स्कूल करमचारियों ने मुस्लिम छात्रों को रोक लिया. छात्रों के काफी अनुनय विनय करने पर भी करमचारियों ने मुस्लिम छात्रों को परीक्षा हॉल में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी.

कोरोना वायरस की आड़ लेकर मुस्लिमों के साथ भेदभाव करने वाले इस मामले के बारे में स्कूल प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा कि रेड जोन क्षेत्रों से आने वाले छात्रों को अलग करने के लिए ऐसा किया गया था. मगर वहां पर मौजूद कुछ प्रत्यक्ष दर्शियों ने इससे अलग बताया कि केवल मुस्लिम छात्रों के साथ ही ऐसा किया जा रहा है जबकि रेड जोन क्षेत्र से आने वाले हिन्दू छात्र परीक्षा हॉल के अन्दर बैठकर ही अपने कागजात लिख रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्कूल प्रशासन पूरी तरह भेदभाव कर रहा है.

कुछ भारतीय समाचार पत्रों एवं टेलीविज़न के मुख्य समाचार चैनलों ने इस भेदभाव को तब बढ़ावा देना शुरू किया जब मार्च में नई दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में बने तबलीगी जमात की एक सभा से कुछ मुस्लिम संक्रमित पाए गए. मीडिया ने मुस्लिमों को कोरोना फैलाने का मुख्य कारण तक घोषित कर दिया.

जानकारी के लिए बताते चलें कि भारत में जनवरी के महीने में कोरोना का पहला मामला सामने आया था मगर मार्च के आखिरी सप्ताह में पूरे देश में लॉकडाउन किया गया, वहीँ 1 जून को लॉकडाउन खोल दिया गया. ना तो लॉकडाउन के दौरान मरीजों की संख्या में कमी आई और लॉकडाउन खुलने के बाद तो तादात और भी बढ़ने लगी है.

निजामुद्दीन क्षेत्र की आड़ लेकर पूरे भारत में मुस्लिमों के खिलाफ भेदभाव की नीति के मामलों में तेज़ी आने की आशंका जताई जा रही है.

 

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