तुर्की – पाकिस्तान दोस्ती और भारत

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इमरान खा़न एवम तैयब अर्दोग़ान
मिर्ज़ा शिबली बेग

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान दो दिवसीय दौरे पर बृहस्पतिवार को पाकिस्तान पहुंचे । वहां नूर खा़न एयरबेस पर उनका स्वागत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खा़न ने अपनी कैबिनेट के सदस्यों के साथ किया । इमरान खा़न तुर्क राष्ट्रपति की गाड़ी को स्वयं चलाकर प्रधानमंत्री आवास ले गए । जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया

 तुर्क राष्ट्रपति के साथ उनकी कैबिनेट के प्रमुख सदस्यों समेत  60 कारोबारी कारपोरेशनो के प्रमुख एवं प्रतिनिधि भी आए । जिनकी संख्या 100 से अधिक थी । तुर्की राष्ट्रपति अपने इस दौरे में पाकिस्तान- तुर्की उच्च स्तरीय ‘स्ट्रैटेजिक कारपोरेशन काउंसिल’ की बैठक की इमरान खान के साथ सहअध्यक्षता करेंगे तथा ‘पाकिस्तान तुर्की बिज़नेस एंड इन्वेस्टमेंट फोरम’ की बैठक को इस्लामाबाद में संबोधित करेंगे । अगले दिन पाकिस्तान की संसद की संयुक्त सभा को संबोधित करेंगे । दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा ,संस्कृति ,पर्यटन , शोध और तकनीकी के क्षेत्र में सहयोग पर वार्ता होगी । तथा ‘मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग’ पर हस्ताक्षर किए जाएंगे ।

पाकिस्तान और तुर्की के मध्य संबंध बहुत मधुर है वर्तमान परिदृश्य में तुर्की के राष्ट्रपति का दौरा दोनों देशों के लिए अहम हैं क्योंकि पाकिस्तान जहां एक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है वहीं दूसरी ओर एफ ए टी एफ (  फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ) की तलवार उसके सर पर लटक रही है । एफ ए टी एफ की बैठक पेरिस में 16 से 21 फरवरी तक चलेगी । तुर्की इसका सदस्य देश है ।

कश्मीर समस्या पर पाकिस्तान के पारंपरिक मित्र अरब देश उसका  साथ नहीं दे रहे हैं । ‘कवालालंपुर समिट’  के अंतिम क्षणों में इमरान खा़न के अरब देशों के दबाव के कारण सम्मिलित ना होने से जहां तुर्की और मलेशिया पाकिस्तान के प्रति असहज हो गए थे वहीं एक देश के रूप में पाकिस्तान की छवि धूमिल हुई थी । पाकिस्तान के भीतर भी इमरान खा़न के इस क़दम की चारों ओर से आलोचना हुई थी । इमरान खा़न ने मलेशिया का दौरा करके और तुर्क राष्ट्रपति को पाकिस्तान दौरे का निमंत्रण देकर दोनों देशों से संबंध को सुचारू करने का प्रयास किया है ।

तुर्क राष्ट्रपति ने कहा  “पाकिस्तान में जिस तरह से उनका स्वागत किया गया इससे वह अभिभूत हैं “र्की राष्ट्रपति ने कश्मीर पर पाकिस्तान का समर्थन करते हुए कहा कि ” कश्मीर जितना अहम पाकिस्तान के लिए है उतना ही तुर्की के लिए भी है “राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अलवी से भी भेंट की तथा पाकिस्तान की संसद की संयुक्त सभा को भी संबोधित किया । जहां उनका जो़रदार स्वागत किया गया । राष्ट्रपति अर्दोग़ान का यह पाकिस्तान का नवां दौरा है । जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की संसद को चार बार संबोधित किया । दो बार प्रधानमंत्री रहते हुए और दो बार राष्ट्रपति रहते हुए । वह पहले राष्ट्र अध्यक्ष हैं जिन्होंने संसद को चार बार संबोधित किया ।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खा़न ने इस्लामाबाद में ‘पाकिस्तान तुर्की बिज़नेस एंड इन्वेस्टमेंट फोरम’ में तुर्की राष्ट्रपति का अभिवादन करते हुए कहा ” मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि राष्ट्रपति  अर्दोग़ान ने अगला चुनाव पाकिस्तान में लड़ा तो वह आराम से जीत जाएंगे । मैंने संसद में देखा कि जब अर्दोग़ानन बोल रहे थे तो सत्ता पक्ष से विपक्ष तक के सांसद मेज थपथपा रहे थे मैंने इससे पहले कभी नहीं देखा कि किसी के संबोधन पर संसद में इस तरह से तालियां गूंजी हो इससे साबित होता है कि पाकिस्तानी अर्दोग़ान को किस हद तक चाहते हैं । ”

बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए अर्दोग़ान ने कहा  “वह चाइना- पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर में पाकिस्तान के साथ काम करने के लिए तैयार हैं । ”
उन्होंने कहा ” जिस ऊंचाई पर हमारे राजनीतिक संबंध है उसी ऊंचाई पर कारोबारी संबंध भी पहुंचे। ” अर्दोग़ान ने कहा कि ” तुर्की पाकिस्तान के मध्य व्यापार को पहले एक बिलियन डॉलर तक पहुंचाना चाहिए उसके बाद पांच बिलियन डॉलर का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए ।”

तुर्की 2023 तक तुर्की को दुनिया की दस बड़ी अर्थव्यवस्थाओं  में से एक बनाना चाहता है । इसके लिए उसने एक ट्रिलियन डॉलर के वयापार का लक्ष्य रखा है । वह पाकिस्तान को एक अवसर से भरपूर मंडी के रूप में देखता है इसके लिए उसने पाकिस्तान के साथ  ‘मुक्त व्यापार समझौते’ के लिए  बातचीत शुरू कर दी है । संबंधों को और अधिक मज़बूत बनाने के लिए  दोनों देशों के बीच ‘दोहरी नागरिकता’ को लेकर भी वार्ता के समाचार हैं ।

तुर्की और पाकिस्तान के मध्य कुल तेरह सहमति पत्र ( मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग ) पर हस्ताक्षर किए गए जिसमें रक्षा भी शामिल है ।

पाकिस्तान , तुर्की से अपनी रक्षा आवश्यकताओं की आपूर्ती बड़े स्तर पर करता है । जिसमें वह तुर्की से युद्धपोत  , जंगी हेलीकॉप्टर , टैंक आदि रक्षा उत्पाद ख़रीदना है । तुर्की ने अपने रक्षा उत्पादन की ओर विशेष ध्यान दिया है । वह अपनी  आवश्यकताओं का 65% स्वयं निर्मित करता है । 2023 तक तुर्की ने अपनी रक्षा आवश्यकताओं का 75% उत्पादन उत्पादन तुर्की में ही करने का लक्ष्य निर्धारित किया है ।  स्टॉकहोम में स्थित ‘इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के अनुसार पिछले 4 वर्षों में तुर्की का रक्षा उत्पाद निर्यात 175% बड़ा है  ।

कश्मीर पर तुर्की का रुख़ भारत के लिए चिंता का विषय है । जिसके लिए भारत ने कूटनीतिक प्रयास किए भारत की ओर से तुर्की को साइप्रस समस्या पर संपूर्ण समर्थन की बात कही गई थी लेकिन तुर्की की ओर से कोई सकारात्मक उत्तर नहीं मिला ।

मलेशिया की भांति भारत तुर्की के विरुद्ध व्यापारिक क़दम नहीं उठा सकता । क्योंकि तुर्की के साथ व्यापार भारत के हित में हैं । तुर्की भारत को 1.2 बिलियन डॉलर का निर्यात करता है । जबकि भारत तुर्की को 7.5 बिलियन डॉलर का निर्यात करता है तुर्की से हुई राजनयिक क्षति की पूर्ति भारत ने सऊदी अरब और संयुक्त अमीरात से अच्छे संबंध बनाकर कर ली है ।

महाद्वीपों के संगम पर स्थित देश तुर्की के अपने अरब पड़ोसी देश सीरिया और इराक़ के साथ संबंध ख़राब हैं । जो कभी भी सऊदी अरब और अरब अमीरात के उकसावे पर गंभीर रूप धारण कर सकते हैं । ईरान तुर्की के बढ़ते प्रभाव और सैन्यशक्ति को ईर्ष्या की दृष्टि से देखता है । वर्तमान में दोनों देशों के संबंध सामान्य है । संकट मुक्त होते ही ईरान के तेवर तुर्की के  प्रति बदल जाएंगे ।

पड़ोसी आर्मीनिया से भी तुर्की की ऐतिहासिक कटुता चली आ रही है जिसमें विश्वास का अभाव है । यूनान और यूनानी साइप्रस तुर्की के घोर विरोधी हैं जो यूरोप की शय पर तुर्की की रक्षा के लिए निरंतर चुनौती बने हुए हैं । अब बचे  पड़ोसी बलग़ारिया और जॉर्जिया जिनसे तुर्की के संबंधों में कोई गर्मजोशी नहीं है । ऐसे में तुर्की बिल्कुल अलग-थलग पड़ गया है  और चारो ओर से शत्रुओं से घिरा हुआ है । अरब देशो ने भी उसके विरुद्ध छाया-युद्ध छेड़ रखा है ।  तुर्की को आवश्यकता है एक विश्वसनीय मित्र की, जो  संकट में मित्रता की कसौटी पर खरा उतरे ।  पाकिस्तान में उसे आभासी मित्र की छवि नज़र आती है ।

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begmirzashibli@gmail.com

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