राहुल गांधी की चेतावनी: गरीब मिट जाएंगे और मध्यवर्ग नया गरीब बन जाएगा

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राहुल गाँधी ने कोरोना वायरस को लेकर एक बड़ी प्रतिक्रिया के अंतर्गत कहा कि कोरोना वायरस के कारण देश के व्यापार और अर्थव्यवस्था पर बड़ा बुरा असर हुआ है. कांग्रेस ने अपने एक बयान में सवाल किया है, बेरोजगारी कोरोना वायरस से पहले ही आसमान छू रही थी और अब तो इसने और भी पैर पसार दिए हैं स्थिति बद से बदतर हो गयी है. उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए वित्तमंत्री से उनकी भावी योजना के बारे में भी सवाल किया. उन्होंने आगे जानना चाहा कि उनके पास क्या कोई ऐसी योजना है जिससे बेरोजगारी को नियंत्रित किया जा सके?

दिन बा दिन उद्योगों की इकाईयां बंद हो रही हैं जिससे बेरोजगारी अपने चरम पर है. श्री गांधी ने इस समस्या से निपटने के लिए सरकार को नक़द राशी खर्च करने का सुझाव भी दिया है. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए नक़द राशि खर्च करना अच्छे विकल्पों में से है, तथा जल्दी ही कदम नहीं उठाये गए तो गरीब पूरी तरह भूखमरी के कगार पर आ जायेंगे और पूँजी पति देश के मालिक बन जायेंगे. उन्होंने अपने ट्वीट के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा.

श्री गांधी ने आशंका जताई है कि जल्दी ही मध्य वर्ग समाज का नया गरीब बन सकता है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गांधी के विचारों का समर्थन करते हुए आगे कहा कि अर्थव्यवस्था को जीवित रखना सरकार का कर्त्तव्य है और अभी से ज़रूरी कदम उठाना भी ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि मांग को बढ़ाने के लिए लोगों के हाथों में पैसे देने ही होंगे जिससे आर्थिक गतिविधियां गति पकड़ सकें.

वित्तमंत्री ने विशेषज्ञों की राय को दर किनार कर रखा है कोरोना से पहले भी भाजपा सरकार अर्थव्यवस्था को वापस लाने में नाकाम रही है तथा कोरोना के बाद अपने प्रमुख आर्थिक आंकड़े छुपा रही है. वित्तमंत्री द्वारा घोषित आत्मनिर्भर भारत योजना केवल ऋण वितरण तक ही सिमित रह गयी है, इससे गरीब जनता और उद्योगों को कोई ज्यादा लाभ नहीं मिला पाया है. गरीब और गरीब होता जा रहा है और अमीरों को सरकार सारी सुविधायें दे रही है. श्री गांधी ने गरीब और मध्यम वर्ग के लिए विशेष चिंता जताई है.

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