शाहीन बाग की महिलाओं ने कोराना वायरस से बचने के लिए धरना स्थल पर तख्त लगवाएं…कोराना में भी रहेगा धरना जारी

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शाहीनबाग का धरना प्रदर्शन 95 दिनों से चल रहा है। दिल्ली दंगों से लेकर कोरोना वायरस के खौफ के बावजूद ये आंदोलन अपने चरम सीमा पर है।शाहीनबाग का प्रदर्शन देश के हर कौने में सीएए, एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ शुरू था। आज भी शाहीनबाग की महिलाएं डटकर धरने पर बैठी हुई है। फर्क इतना है कि कोरोना वायरस के डर से यहां पर सौ लकड़ीयों की चौकियां लगा गदी गई है। धरना स्थल पर एक चौकी पर पांच लोगों को बैठने को कहा या है।

ताकि लोग इक्ठ्ठा होकर ना बैठ सके जिससे कोरोना वायरस का खतरा कम हो ।कोरोना जैसे खतरनाक बीमारी से एहतियात बरत सके। धरने पर बैठी बुर्जग महिलाओं के लिए मास्क लगाने को कहा गया और प्रदर्शन से बच्चों को दूर रहने के लिए कह भी कहा गया है। धरना पर बैठे लोगों का कहना है कि हमारी मांग सरकार जबतक नही मानती हम धरना पर बैठे रहेगें चाहे दिल्ली दंगा हो या कोरोना वायरस का डर लेकिन जबतक सरकार हमारी बात नही मानती और काला कानून वापस नही लेगी हम इसी तरह से बैठेगें। वही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी दिल्ली वालों से अपील करते हुए लोगों को भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने के लिए मना किया है।

और 31 मार्च तक स्कूल,कालेज, सिनेमाघरों को दिल्ली में बंद करवा दिया गया है। पिछले साल दिसंबर से चल रहा  ये आंदोलन शाहीनबाग से शुरू हुआ, और आज देश के कौने-कौने में कई शाहीनबाग बनकर आंदोलन हो रहा और सरकार से सीएए, एनपीआर एनआरसी को वापस लेने के लिए की अपील  कर धरना पर बैठे हुए है। दिल्ली देगों से लेकर कोरोना तक का सफर शाहीन बाग की महिलाओं ने कहा कि हम बिना डरे तय करेगें सरकार को हमारी बात सुननी पड़ेगी हम सड़कों पर हक की लड़ाई लड़ने के लिए बैठे है। वही आंदोलनकारियों ने ये भी कहा कि हम इसी देश के नागरिक है लेकिन सरकार को हमारी परवाह नही है। वो हमसे बात करने से हमारी जायज मांग से ऐसे पिछा नही छुड़ा सकते है।

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