होर्डिग मामले को लेकर सु्प्रिम कोर्ट से मिला योगी सरकार को फटकार-किस कानून के तहत लगाया गया पोस्टर

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लखनऊ में सीएए कानून को लेकर योगी सरकार ने 40 लोगों की दीवार पर होर्डिग लगाई थी। जिसका इलाहबाद हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए योगी सरकार को फटकार लगाते हुए,होर्डिग हटाने के लिए कहा गया था। लेकिन यूपी सरकार ने इस मामले को सुप्रिम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। लेकिन योगी सरकार की सप्रिम कोर्ट से भी बड़ा झटका लगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कहा कि वर्तमान में ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसके माध्यम से नाम उजागर कर शर्मिंदा करने वाली राज्य सरकार की कार्रवाई को उचित ठहराया जा सके। सुप्रिम कोर्ट ने भी इस मामले को लेकर योगी सरकार को कहा कि किसी भी नागरिक का इस तरह से सार्वजनिक स्थल पर नाम उजागर करने का कोई कानून नही। इस तरह से लोगों के निजि जीवन में उथल पुथल का सामना करना पर सकता है।बता दें कि यूपी सरकार ने 9 मार्च को दिए हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। गुरुवार को जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की वेकेशन बेंच में इस मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने योगी सरकार से पूछा कि किस कानून के तहत आरोपियों के होर्डिंग्स लगाए गए। अब तक ऐसा कोई प्रावधान नहीं बना है जहां इस तरह की संविधान इजाजत देता हो।

इस मामले को लेकर अगले हफ्ते नई बेंच सुनवाई करेगी। वही इस तरह के अंजाम को लेकर पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनके भी पोस्टर लगाए गए। सरकार को कानून के मुताबिक ही कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन सरकार की मंशा केवल अंतिम फैसले से पहले इन लोगों को बदनाम करने की थी। पोस्टरों में उनके नाम और पते तक लिखे गए हैं। यह एक तरह से आम लोगों को खुला न्यौता है कि कोई भी उनके घरों में घुसकर या राह चलते मारपीट करे। इस तरह की हरकत से सरकार लीचिंग को बढ़ावा देने का काम कर रही है। ये देश लोकतंत्र है और यहां पर हर किसी को बोलने की आजादी है। लेकिन योगी सरकार इस तरह का काम करके अपना सोच जग जाहिर कर रही है। सरकार की मुखालफत करना कोई गुनाह नही है।

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