ओडिशा में धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा नाबालिग़ ईसाई लड़के की निर्मम हत्या

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लेखक : शिबू थॉमस

भारत जैसे विविधता से परिपूर्ण देश में जहाँ विभिन्न धर्म, जाति और भाषाओं के लोग साथ मिलकर रहते हैं, लेकिन कुछ के वर्षों में कुछ धर्म विशेष के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, इस प्रकार की घटनाएं अब आम हो चली है इसपर अंकुश लगता नहीं दिख रहा है. इसी कड़ी में एक और घटना सामने आई है जो कि भारत के पूर्वी राज्य उड़ीसा की है, जहाँ पर धार्मिक कट्टरपंथियों ने एक 14 वर्षीय ईसाई लड़के की हत्या कर दी.

मलकानगिरी के पादरी बिजय ने बताया कि घटना 04/06/2020 की रात की है जहाँ कुछ धार्मिक कट्टरपंथियों ने ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार किया और ईसाईयों के अपहरण का प्रयास किया. धार्मिक कट्टरपंथियों की ये भीड़ उस गाँव की नहीं बताई जा रही है.

इस हादसे का शिकार हुए ईसाई लड़के का नाम सामारू मदकामी है और वह सातवीं कक्षा का छात्र था. धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा इस नन्ने बच्चे पर कोई रहम ना करते हुए इसके सर को पहले पत्थरों से कुचलकर इसकी गर्दन को काट दिया. हत्यारे अपने इस कुतर्क को छुपाने के लिए दफनाते हुए घटनास्थल से फरार हो गए।

पादरी बिजय के अनुसार ये कोई पहली घटना नहीं है सन 2020 से अब तक कई हमले हो चुके हैं और इसकी 4 से ज्यादा बार शिकायत भी की जा चुकी है. यह घटना मलकानगिरी की तहसील मुदुलीपाड़ा के गाँव केंदुगुड़ा की है. सामारू मदकामी के पिता का नाम उन्गा मदकामी है, जो बेथेल हाउस चर्च में काम करता है. बच्चे की माता का देहांत पहले ही हो चुका था.

“पिछले 4 वर्षों में मैं 1500 से अधिक मामलों में शामिल रहा हूं, यह अब तक ईसाई उत्पीड़न का सबसे वीभत्स करने वाला मामला है। धार्मिक असहिष्णुता अब नए अमानवीय ऊँचाइयों पर पहुंच गया है।“ पर्सपेक्शन रिलीफ के संस्थापक शिबू थॉमस ने बयान दिया.

पिछले महीने एक ही जगह के दो मामलों में ऐसे धार्मिक कट्टरपंथियों के द्वारा 3 ईसाइयों को जूट के बैग में भरकर नदी में फेंकने की कोशिश की गई थी। वहीँ 2 ईसाइयों को आग के हवाले कर देने का प्रयास भी सामने आया है.

पादरी बिजय ने 05/06/2020 को लापता किशोर के बारे में सुबह 9 बजे मलकानगिरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की थी. थाना प्रभारी ने तुरंत कार्यवाही करते हुए उसी रात लगभग 9 बजे तक 10-12 संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया. शिकायत करता के सामने ही पूछताछ करने पर उन्होंने अपना जघन्य अपराध कबूल कर लिया.

इस मामले में पीड़िता के पिता उन्गा मदकामी की ओर से आईपीसी 1860 की धारा 295-ए, 367,506,34, एफआईआर नंबर: 0180, दिनांक 05/06/20 तहत प्राथमिकी दर्ज की। एफआईआर रात 2:20 मिनट पर दर्ज की गई तथा पुलिस इंस्पेक्टर राम प्रसाद नाग को मामले की जांच का ज़िम्मा सोंपा गया है.

उड़ीसा में ऐसी घटनाओं की लम्बी श्रंख्ला है जिसमें ग्राहम स्टेंस और उनके दो युवा बेटों फिलिप और टिमोथी को 23/01/2017 को एक हिंदू कट्टरपंथी समूह द्वारा जिंदा जला दिया गया था। अनंतराम गोंड को 11/02/2019 को नक्सलियों द्वारा केवल इसलिए मार दिया गया के वो ईसाई धर्म में विश्वास रखते थे. इस प्रकार की घटनाओं के आंकड़ों को अगर देखा जाए तो उड़ीसा ईसाई उत्पीड़न के मामले में 10 वें स्थान पर आता है. जनवरी 2016 से  इन मामलों में अभूतपूर्व उछाल देखने को मिला है जिसमें मार्च 2020 तक लगभग 1961 मामले पंजीकृत हुए वही दूसरी ओर अगर जमीनी स्तर पर देखें तो इन मामलों का आंकड़ा और भी भयानक हो सकता है क्यूंकि बहुत सारे मामले पंजीकृत नहीं हो पाते हैं.

अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) की रिपोर्ट को अगर माना जाए तो भारत अब धार्मिक उत्पीड़न के मामले में 10 नंबर पर पहुँच चुका है जो कि 7 वर्ष पहले 31 वें नंबर पर था. धार्मिक उत्पीड़न के मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ वर्ष पहले इराक और अफगानिस्तान सबसे आगे थे मगर अब भारत ने इराक को पीछे कर दिया है और शायद कुछ वर्षों में अफगानिस्तान भी आगे ना रह पाए.

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