पश्चिम बंगाल में हुई दो हिन्दू की गाय चोरी के शक में मोब लिंचिंग

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Mob Lynching

देश में मॅाब लिंचिंग का मामला बढ़ता जा रहा है। खासकर मुसलमानों के साथ लिंचिंग आम हो चुका है। केंद्र में बैठी सरकार लिंचिंग जैसे डरवाने मामले पर कोई ठोस कानून नही बना पाई है।

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर से मॉब लिंचिंग की घटना सामने आई है। पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में पशु चोरी के शक में दो लोगों की पीट-पीटकर मार दिया गया है। ये मामला गुरूवार का है जब रबीउल इस्लाम और प्रकाश दास एक पिकअप वैन में दो गायों को लेकर जा रहे थे। और उन लोगों को भीड़ ने गाय चोरी के इल्जाम में पीट-पीट कर बेरहमी से मार दिया। इस मामले में पुलिस का कहना है कि भीड़ ने वैन को रोका और गायों को बरामद किया।

उनका दावा था कि इन्हें क्षेत्र से कुछ दिनों पहले चुराया गया था और अब उन्हें पशु चोर लेकर जा रहे हैं। इसके बाद भीड़ ने उनकी पिटाई करना शुरू कर दिया और वैन में आग लगा दी। पुलिस का कहना है कि उन्होंने पीड़ितों को अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन चोट ज्यादा लगने के कारण उनकी मौत हो गई।

आज देश में जो हालात पैदा कि गई है उससे तो एक बात साफ हो चुकी है कि मुसलमानों और दलित समाज के लोगों के साथ सरकार का दौहरा रवैया है। जिसे साफ तौर पर देखा जा

सकता है। क्या इंसानों की कीमत एक जानवर से बढ़कर है। जहां पर गाय के नाम पर इंसानों को मौत के घाट उतार कर फैंक दिया जाता है। देश का कानून इतना

कमजोर हो चुका है कि हर कोई कानून अपने हाथ में ले लेता है और सरकार तमाशगीन बनी देखते रहती है। बता दे कि पश्चिम बंगाल विधानसभा ने हाल ही में

विधेयक, 2019 को पास किया है जिसमें की मॅाब लिंचिंग जैसी घटनाओं को रोका जा सके । जिसपर राज्यपाल के हस्ताक्षर का इंतजार किया जा रहा है। आपको बता दे

कि इस तरह का मामला कोई नई बात नही है, इससे पहले भी झारखंड में तबरेज अंसारी, अलबर के पहलू खान, दादरी के अखलाक, रकबर जैसे कई मामला सामने आया

है जहां पर भीड़ ने कई गुनेगाहरों को मौत की नींद सुला दी है। फिर भी सत्ता में काबिज सरकार को ये मामला नजर नहीं आता है।

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