अमित शाह की रैली में सीएए,एनआरसी का विरोध करने पर लड़कियों को घर से निकलवाया गया

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देशभर में सीएए,एनआरसी कानून को लेकर कड़ा प्रदर्शन हो रहा है।लोग अपने घरो से निकल कर सड़कों पर है,लगातार सरकार से मांग कर रहे है कानून वापस लेने के लिए लेकिन इन सभी विरोध के बावजूद भाजपा सरकार अपनी मनमानी करती दिख रही है। वही इस बात का अंदाजा गृहमंत्री अमित शाह को हो चुका है बता दे कि अमित शाह 5 जनवरी को CAA के फायदे गिनाने दिल्ली के लाजपत नगर डोर टू डोर कैंपन करने पहुंचे थे। यहां दो महिलाओं ने अमित शाह का विरोध करते हुए घर की बालकनी से पोस्टर’ दिखाकर विरोध जताया था। बैनर के बीच में बड़े-बड़े अक्षरों में शेम ऑन और दोनों तरफ सीएए और एनआरसी लिखा हुआ था। इसके अलावा उसपर जयहिंद, आजादी और ‘नॉट इन माई नेम’ भी लिखा था।विरोध जताने वाली दो लड़किया में से एक वकील सूर्या रजप्पन है।

उनका कहना था कि गृह मंत्री को सीधे सुनाने का हमारे पास यह एक मौका था। अगर हम उस वक्त मैं ऐसा नहीं करते तो यह मेरी सबसे बड़ी गलती होती। मुझे पूरी जिंदगी इसका अफसोस होता कि हमने अपने हक के लिए आवाज नही उठाया। उन लड़कियों का ये भी आरोप है कि इस विरोध को देखकर, रैली में शामिल लोग गुस्सा हो गए और गलत शब्दों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया और तो और वो लोग उनके अपार्टमेंट के नीचे सड़क पर लगभग 150 लोगों की भीड़ जमा थी, जिन्होंने बालकनी से लटकाए गए विरोध बैनर को फाड़ दिया गया और अपने साथ ले गए। और सीढ़ियों से ऊपर चढ़ने की कोशिश करने लगा। साथ ही धमकी दी कि अगर उन्हें ऊपर नहीं आने दिया गया तो दरवाजा तोड़ दिया जाएगा।

अगर कोई सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है तो वो इस तरह का रवैया अपनाते है। बता दे कि इस हादसे के बाद ही उन दोनों लड़किया जो कि लाजपत नगर में कियारे के मकान में रहती थी। उनको वहां से घर खाली करवा दिया गया है। वो भी इस लिए क्योकि उन लोगों ने अमित शाह के सामने सीएए और एनआरसी का विरोध किया था।

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