योगी सरकार होर्डिग मामले को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने का बना रही मन ,योगी के सलाहकार ने कहा विक्लपो पर कर रहे विचार

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यूपी के लखनऊ में योगी सरकार ने सीएए का विरोध करने वाले लोगों पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पुहचानें तोड़फोड़ का  आरोप लगाकर लखनऊ में योगी सरकार ने 40 लोगों का होर्डिग पर फोटो के साथ उनके पिता और घर का पता लिखवाया था। वही इस मामले का इलहाबाद हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए योगी सरकार को फटकार लगाते हुए 16 मार्च तक होर्डिग हटाने का आदेश दिया।

मुख्य न्यायधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। अदालत ने कहा बिना कानूनी उपबंध के नुकसान वसूली के लिए पोस्टर में फोटो लगानासंविधान के खिलाफ है,उनकी  निजता के अधिकार का हनन है। बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए किसी की फोटो सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करना गलत है। वही इस मामले को लेकर योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने का विचार कर रही है।

बता दे कि  इस बारे में अभी कोई निर्णय हुआ नहीं है, लेकिन इस संबंध में अधिकारियों ने हलचल तेज कर दी है। इस मामले में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मशविरा करके और उनके निर्देशानुसार ही लिया जाएगा। योगी आदित्यनाथ ने इस बारे में तल्ख करते हुए कहा,हाई कोर्ट के आदेश का अध्ययन कराया जा रहा है।

सरकार की पहली प्राथमिकता यूपी की 23 करोड़ जनता की सुरक्षा है, जो जनता के हित में होगा, उसी हिसाब से निर्णय लिया जाएगा। लखनऊ में हाई कोर्ट के आदेश को देखते हुए अपर मुख्य सचिव  अवनीश कुमार ने लोकभवन में बैठक की लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश, पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय और न्याय विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर योगी सरकार सलाह मशवरा के साथ कोर्ट जाएंगे।

वही इस पूरे मामले को लेकर जिन लोगों के फोटो लगवाए गएं है। उनमे सदफ जफर एक्टिव्स्ट से लेकर कई बड़े नामों के माम शामिल है। उनका कहना है के कि हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया ये अच्छी बात है,लेकिन हम खुद कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की प्रकिया में लगे है। जिस तरह से हमारे फोटो को सड़कों पर लगा कर पता के साथ हमारे प्राईवेसी में दखल दिया गया इससे साफ साफ सरकार के मंसूबे को दर्शाता है कि सरकार क्या करवाना चाहती है।लोकतंत्र में बोलने की आजादी छिनती जा रही है।

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